Sunday, 12 February 2017

आलू

आलू

भारत और विश्व में आलू विख्यात है और अधिक उपजाया जाता है| आलू को हमेशा छिलके समेत पकाना चाहिए क्योंकि आलू का सबसे अधिक पौष्टिक भाग छिलके के एकदम नीचे होता है, जो प्रोटीन और खनिज से भरपूर होता है। आलू में स्टॉर्च, पोटाश और विटामिन ए व डी होता है।

यह अन्य सब्जियों के मुकाबले सस्ता मिलता है लेकिन है गुणों से भरपूर | आलू से मोटापा नहीं बढ़ता| आलू को तलकर तीखे मसाले, घी आदि लगाकर खाने से जो चिकनाई पेट में जाती है, वह चिकनाई मोटापा बढ़ाती है| आलू को उबालकर अथवा गर्म रेत या राख में भूनकर खाना लाभदायक और निरापद है|

आलू में विटामिन बहुत होता है| आलू को छिलके सहित गरम राख में भूनकर खाना सबसे अधिक गुणकारी है|

-भुना हुआ आलू पुरानी कब्ज और अंतड़ियों की सड़ांध दूर करता है| आलू में पोटेशियम साल्ट होता है जो अम्लपित्त को रोकता है|

-चार आलू सेंक लें और फिर उनका छिलका उतार कर नमक, मिर्च डालकर नित्य खाएं। इससे गठिया ठीक हो जाता है|

हरा भाग खतरनाक
-आलू के हरे भाग में सोलेनाइन विषैला पदार्थ होता है, जो शरीर के लिए नुकसानदायक होता है। आलू के अंकुरित हिस्से का भी प्रयोग नहीं करना चाहिए।

-आलुओं में प्रोटीन होता है, सूखे आलू में 8.5 प्रतिशत प्रोटीन होता है| आलू का प्रोटीन बूढ़ों के लिए बहुत ही शक्ति देने वाला और बुढ़ापे की कमजोरी दूर करने वाला होता है|

-आलू में कैल्शियम, लोहा, विटामिन-बी तथा फास्फोरस बहुतायत में होता है| आलू खाते रहने से रक्त वाहिनियां बड़ी आयु तक लचकदार बनी रहती हैं तथा कठोर नहीं होने पातीं|

-इसको छिलके सहित पानी में उबालें और गल जाने पर खाएं।

-यदि दो-तीन आलू उबालकर छिलके सहित थोड़े से दही के साथ खा लिए जाएं तो ये एक संपूर्ण आहार का काम करते हैं|

-आलू के छिलके ज्यादातर फेंक दिए जाते हैं, जबकि अच्छी तरफ साफ़ किये छिलके सहित आलू खाने से ज्यादा शक्ति मिलती है|

- कभी-कभी चोट लगने पर नील पड़ जाती है। नील पड़ी जगह पर कच्चा आलू पीसकर लगाएँ|

- शरीर पर कहीं जल गया हो, तेज धूप से त्वचा झुलस गई हो, त्वचा पर झुर्रियां हों या कोई त्वचा रोग हो तो कच्चे आलू का रस निकालकर लगाने से फायदा होता है।|

-गुर्दे की पथरी में केवल आलू खाते रहने पर बहुत लाभ होता है| पथरी के रोगी को केवल आलू खिलाकर और बार-बार अधिक पानी पिलाते रहने से गुर्दे की पथरियाँ और रेत आसानी से निकल जाती हैं|

-उच्च रक्तचाप के रोगी भी आलू खाएँ तो रक्तचाप को सामान्य बनाने में लाभ करता है|

-आलू को पीसकर त्वचा पर मलें। रंग गोरा हो जाएगा|



- संकलित

खजूर

खजूर मधुर, शीतल, पौष्टिक और तुरंत शक्ति देने
वाला होता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम,
पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस आदि प्रचुर
मात्रा में पाए जाते हैं। खजूर खाने से ब्लड तेजी से
बनता है। यह हृदय और मस्तिष्क को शक्ति देता है। साथ
ही, लीवर के रोगों में
लाभकारी होता है। इसके अलावा, यह वात-पित्त-कफ
नाशक होता है। यह हमारे पाचन तंत्र
को भी पूरी तरह से साफ करता है। आज
हम आपको खजूर के फायदों के बारे में बता रहे हैं।
1-बच्चों के लिए उपयोगी: कमजोर बच्चों को खजूर और
शहद मिलाकर खिलाना बहुत फायदेमंद होता है। जिन बच्चों में रात
को बिस्तर गीला करने की आदत
होती है, उन बच्चों को दूध के साथ खजूर खाने के लिए
दें।
2-पेट के रोग होंगे दूर :इससे आंतों को बल और शरीर
को स्फूर्ति मिलती है। खजूर आंतों के हानिकारक
जीवाणुओं को नष्ट करता है। इसके विशिष्ट तत्व ऐसे
जीवाणुओं को जन्म देते हैं,
जो आंतों की सक्रियता बढ़ाते हैं।
3-मजबूत होंगे दांत :खजूर में मौजूद कैल्शियम
दांतों की कमजोरी को दूर करता है। इसके
अलावा, खजूर में पाया जाने वाला फ्लोरीन नामक मिनरल
दांतों की समस्या को दूर करने में सहायक होता है।
4-ब्लड प्रेशर को काबू करे:खजूर के सेवन से कुछ
ही दिनों में लो ब्लड प्रेशर की समस्या से
छुटकारा मिल जाता है। रोज 3-4 खजूर गर्म पानी में
धोकर खाएं।


- संकलित

डेंगू

मित्रांनो, आजची हेडलाईन आहे मुंबईत डेंग्यूचा कहर.
डेंग्यूमुळे अनेक जण आजारी पडले असून काही जण
मृत्यूशी झुंजत आहेत.
ह्या जीवघेण्या आजारावर एक औषध अतिशय
प्रभावी असून 3 ते 4 दिवसातच रुग्ण पूर्ण बरा
होतो.
त्या औषधाचे नाव आहे
Eupatorium perf 200
हे औषध होमिओपथी फार्मसी मध्ये मिळेल.
हे औषध liquid मध्ये विकत घ्यावे आणि दर 3
तासाला 2 थेंब थेट जिभेवर घेत रहावे.
डेंगू तापामध्ये रक्तातील प्लेटलेट्स कमी होतात
त्यांची संख्या ह्या औषधाने 6 तासातच वाढू
लागते आणि 24 तासातच नॉर्मल होते.
इथे एक महत्वाची गोष्ट सांगू इच्छितो की
कोणताही ताप किंवा अंगदुखी आणि डोकेदुखी
(विशेषतः डोळ्यांच्या मागे दुखणे) हे डेंगू चे लक्षण
असू शकते.
म्हणून आपल्याला असलेला कोणताही ताप डेंगू
असेल किंवा नसेल तरी हे औषध घ्यायला काहीच
हरकत नाही.
तसेच इतर उपचारपद्धती सोबत सुद्धा हे औषध घेऊ
शकता,ज्याने फायदाच होईल.
कमीतकमी 3 ते 4 दिवस औषध जरूर घ्यावे.
तुमचा ताप डेंगू नसला तरी ह्या औषधाने कोणतेही
side effect न होता तुमच्या तापाला आणि
अंगदुखीला ह्या औषधाने नक्की आरामच मिळेल
ह्याची खात्री बाळगा.
आज अनंत चतुर्दशीच्या मुहूर्तावर पार्थिव
गणेशाच्या मूर्ती सोबतच जीवघेण्या डेंग्यूचे ही
विसर्जन करूयात.
कृपया जनहितार्थ लिहिलेली ही पोस्ट सर्वत्र
फॉरवर्ड करावी ही विनंती.
डॉ प्रसाद हजारे
व्हाट्स अप 9881374994


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डायबेटीस

20 वर्षों से डायबिटीज झेल रहीं 65 वर्षीय महिला जो दिन में दो बार इन्सुलिन लेने को विवश थीं, आज इस रोग से पूर्णतः मुक्त होकर सामान्य सम्पूर्ण आहार ले रही हैं | जी हाँ मिठाई भी |
डाक्टरों ने उस महिला को इन्सुलिन और अन्य ब्लड सुगर कंट्रोल करने वाली दवाइयां भी बंद करने की सलाह दी है |
और एक ख़ास बात | चूंकि केवल दो सप्ताह चलने वाला यह उपचार पूर्णतः प्राकृतिक तत्वों से घर में ही निर्मित होगा, अतः इसके कोई दुष्प्रभाव होने की रत्ती भर भी संभावना नहीं है |
मुम्बई के किडनी विशेषज्ञ डा. टोनी अलमैदा ने दृढ़ता और धैर्य के साथ इस औषधि के व्यापक प्रयोग किये हैं तथा इसे आश्चर्यजनक माना है |
अतः आग्रह है कि इस उपयोगी उपचार को अधिक से अधिक प्रचारित करें, जिससे अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें |
देखिये कितना आसान है इस औषधि को घर में ही निर्मित करना |
आवश्यक वस्तुएं–
> 1 – गेंहू का आटा 100 gm.
> 2 – वृक्ष से निकली गोंद 100 gm.
> 3 - जौ 100 gm.
> 4 - कलुन्जी 100 gm.
> निर्माण विधि-
उपरोक्त सभी सामग्री को ५ कप पानी में रखें | आग पर इन्हें १० मिनिट उबालें |
इसे स्वयं ठंडा होने दें | ठंडा होने पर इसे छानकर पानी को किसी बोतल या जग में सुरक्षित रख दें |
> उपयोग विधि-
सात दिन तक एक छोटा कप पानी प्रतिदिन सुबह खाली पेट लेना |
अगले सप्ताह एक दिन छोड़कर इसी प्रकार सुबह खाली पेट पानी लेना | मात्र दो सप्ताह के इस प्रयोग के बाद आश्चर्यजनक रूप से आप पायेंगे कि आप सामान्य हो चुके हैं और बिना किसी समस्या के अपना नियमित सामान्य भोजन ले सकते हैं |
जिस किसी के पेरेंट्स को प्रॉब्लम हो उपयोग करे

आगे फॉरवर्ड करे  साभार -

Dr. Sanjeev Agarwal, Meerat City (U.P.) 09412835222


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Thursday, 2 February 2017

अच्छी नींद

अच्छी नींद के लिए घरेलू नुस्खे



अच्छी नींद लेना स्वास्‍थ्‍य के लिए बहुत फायदेमंद होता है। अगर आप भरपूर नींद लेते हैं तो कई बीमारियों से दूर रहते हैं। लेकिन अगर आपको भरपूर नींद नहीं आती है तो कई बीमारियां होना शुरू हो जाती हैं। नींद न आने के कारण शरीर उतना फुर्तीला और ऊर्जावान नहीं रहता है। अच्छी नींद न आने से दिनभर सिरदर्द, मन न लगना, थकान लगने जैसी समस्याएं होती हैं। नींद न आने की मुख्य वजह व्यस्त, दिनचर्या और असंतुलित खान-पान होता है। अगर आपको अच्छी नींद नहीं आ रही है तो हम आपको कुछ घरेलू नुस्खे बता रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप भरपूर नींद ले सकते हैं।

अच्छी नींद के लिए घरेलू उपचार –

सर्पगंधा, अश्वगंधा और भांग तीनों को बराबर मात्रा में ले लीजिए। इसको पीसकर चूर्ण बना लीजिए। रात में सोते वक्त 3-5 ग्राम मात्रा में यह चूर्ण पानी के साथ लेने से अच्छी नींद आती है।

अश्वगंधा, ब्राह्मी, शंखपुष्पी, शतावरी, मुलहटी, आंवला, जटामासी, खुरासानी, अजवायन इन सबको लगभग 50-50 ग्राम लेकर बारीक चूर्ण बना लीजिए। रात को सोने से पहले लगभग 5 ग्राम चूर्ण दूध के साथ लीजिए। एक सप्ताह के अंदर इसका प्रभाव दिखेगा और आपको अच्छी नींद आएगी।

रात में सोने से पहले तलवों पर सरसों के तेल से मालिश करनी चाहिए। इससे दिमाग शांत और स्थिर होता है और अच्छी नींद आती है।

रात में सोने से पहले अपने हाथ, मुंह, पैर को अच्छी तरह से साफ पानी से धोकर सोने से नींद अच्छी आती है। सोने से पहले चाय या कॉफी आदि का सेवन न करें। क्योंकि, इनसे दिमाग की शिराएं उत्तेजित हो जाती हैं जिनके कारण अच्छी और गहरी नींद नहीं आ पाती है।

अगर तनाव के कारण नींद नहीं आ रही है तो अपने मन पसंद का संगीत सुनें या फिर अच्छा साहित्य पढें। ऐसा करने से मन शांत होगा और अच्छी नींद आएगी।

रात को सोने से पहले अपने दिमाग से सभी प्रकार के मानसिक तनावों को निकाल दी�

हृदयविकार

बंगळुरू येथील प्रसिद्ध नारायणा हृदयालय रुग्णालयाचे प्रमुख डॉ. देवी शेट्टी यांच्याशी विप्रो येथील कर्मचार्‍यांनी हृदयविकार आणि त्यासंबंधी घ्यावयाच्या उपायांसंदर्भात केलेले मार्गदर्शन.

प्र. - हृदयाची काळजी कशी घ्यावी?
उ. - १) योग्य खान-पान, कमी कार्बोहाड्रेटस, जास्त प्रोटीन आणि कमी तेल.
२) आठवड्यातून किमान अर्धा तास चालणे, लिफ्टचा वापर न करणे, एका ठिकाणी जास्त वेळ बसू नये.
३) स्मोकिंग बंद करावी.
४) वजन नियंत्रणात ठेवणे.
५) बी. पी. (ब्लडप्रेशर) आणि शुगर नियंत्रणात ठेवणे.

प्र. - नॉनव्हेजमध्ये मासे हृदयासाठी चांगले असतात का?
उ. - नाही

प्र. - एखाद्या तंदरुस्त व्यक्तीला अचानक हृदयविकाराचा झटका का येतो?
उ. याला सायलेंट अटॅक म्हणतात. त्यामुळे वय वर्षे ३० नंतर नियमित चेकअप करावे.

प्र. - हृदयविकार हा अनुवंशिक आजार आहे का?
उ. - होय!

प्र. - हृदयावरील तणाव कमी करण्यासाठी काय केले पाहिजे.
उ. - आयुष्याकडे पाहण्याचा दृष्टिकोन बदलायला हवा. प्रत्येक गोष्ट मिळालीच पाहिजे असा अट्टाहास करू नये.

प्र. -  चालणे चांगले की जॉगिंग? जिममध्ये व्यायाम केल्यास हृदयासाठी चांगले असते का?
उ. - चालणे कधीही चांगलेच. जॉगिंंगमुळे शरीराच्या जॉईंट्सना इजा पोहोचू शकते.

प्र. - कमी रक्तदाब असलेल्या व्यक्तींना हृदयविकार होतो का?
उ. - शक्यता फारच कमी.

प्र. - कोलेस्ट्रॉल वाढण्याची प्रक्रिया कधी होते. ३० वर्षांनंतर कोलेस्ट्रॉलची काळजी घ्यावी का?
उ. - शरीरात लहानपणापासूनच कोलेस्ट्रॉल असते.

प्र. - अनियमित खाण्यामुळे हृदयावर काय परिणाम होतो.
उ. - अनियमित खात असा आणि त्यातही जंकफूड असेल तर पचनसंस्थेमध्येच गडबड होते.

प्र. - औषध न घेता कोलेस्ट्रॉल कसा नियंत्रणात आणावा?
उ. - खाण्यावर नियंत्रण, नियमित चालणे आणि आक्रोड खाणे.

प्र. - हृदयासाठी कोणते अन्न चांगले आणि वाईट आहे?
उ. - फळे आणि भाज्या हृदयासाठी चांगल्या. तेल सर्वांत वाईट.

प्र. - कोणते तेल चांगले? सूर्यफूल, शेंगदाणा, सोयाबीन, ऑलिव्ह ऑईल?
उ. - सवर्च तेल वाईट.

प्र. - नियमित वैद्यकीय तपासणी म्हणजे काय?
उ. - वय वर्षे ३० नंतर सहा महिन्यांतून एकदा रक्त तपास करवी, शुगर आणि कोलेस्ट्रॉल, बी.पी. चेक करावा. डॉक्टरांच्या सल्ल्याने ट्रेड मील आणि इको टेस्ट करावी.

प्र. - हृदयविकाराचा झटका आल्यानंतर प्रथमोपचार काय करावेत?
उ. - त्या रुग्णाला तत्काळ झोपवावे, त्याच्या जिभेखालच्या बाजूला ऍस्पिरीन किंवा सॉरबिट्रेट ही गोळी ठेवावी. वेळ न दवडता आणि ऍम्ब्युलन्सची वाट न पाहता जवळच्या हृदयविकार रुग्णालयात तत्काळ घेऊन जावे. बहुतांशी मृत्यू पहिल्या एक तासात होतात.

प्र. - ऍसिडीटी, गॅसेसमुळे छातीत होणारी जळजळ आणि हृदयविकाराचा त्रास हे कसे ओळखावेत?
उ. - डॉक्टरांकडे जाऊन ई.सी.जी. केल्याशिवाय हे समजणे कठीण आहे.

प्र. - तरुणांमध्ये ३० ते ४० वर्षांच्या आत हृदयविकाराचा झटका येण्याचे प्रमाण का वाढले आहे?
उ. - चुकीची लाईफस्टाईल, स्मोकिंग, जंकफूड, व्यायामाचा अभाव यामुळे अमेरिका आणि युरोपपेक्षा तीनपट जास्तm हृदयविकाराचे रुग्ण India  आहेत.

प्र. - अनेकांचे जीवनमान दगदगीचे आहे. अनेकांना रात्रपाळी करावी लागते. त्याचा परिणाम हृदयावर होतो का?
उ. - जेव्हा तुम्ही तरुण असता तेव्हा निसर्ग रक्षण करीत असतो. परंतु जसजसे वय वाढत जाते, तसा शरीरराचाही आपण आदर केला पाहिजे. यात बदल हवा.

प्र. - जवळच्या नातेवाईकांमध्ये लग्न केल्यामुळे जन्मलेल्या मुलाला हृदयाचा काही आजार असू शकतो का?
उ. - होय! काही प्रमाणात मुलांमध्ये ही लक्षणे दिसू शकतात.

प्र. - उच्च रक्तदाब म्हणजे बी. पी. (ब्लडप्रेशर) नियंत्रित ठेवण्यासाठी घेण्यात येणार्‍या औषधांचे साईड इफेक्ट दिसतात का?
उ. - होय! अनेक औषधांचे साईड इफेक्ट असतात. मात्र, सध्या अनेक सुधारणा झाल्यामुळे आधुनिक औषधे अधिक चांगली आहेत.

प्र. - जास्त चहा, कॉफी घेतल्यामुळे हार्टऍटॅक येतो का?
उ. - नाही!

प्र. - अस्थमाचा आजार आणि हृदयविकाराचा काही संबंध आहे का?
उ. - नाही!

प्र. - केळी खाल्ल्यामुळे बी. पी. नियंत्रणात येतो का?
उ. - नाही!

प्र. - जंकफूड म्हणजे काय?
उ. - फ्राईड केलेेले मॅकडोनल्डस आणि तत्सम ठिकाणी बनविले जाणारे अन्न, समोसा आणि मसाला डोसाही.

प्र. - नियमित चालण्यासाठी वेळ मिळाला नाही आणि एकाच जागी खूप वेळ बसून काम करावे लागत असेल तर काय करावे?
उ. - एकाच जागी तासाभरापेक्षा जास्त वेळ बसू नये. जागेवरच थोडा वेळ उभे राहावे किंवा एका खुर्चीवरून दुसर्‍या खुर्चीवर बसले तरीही चालते, पण आठवड्यातून पाच दिवस किमान अर्धा तास चालल्यास उत्तमच!




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रिफाइन तेल

♨♨♨  रिफाइन तेल  ♨♨♨

आज से 50 साल पहले तो कोई रिफाइन तेल के बारे में जानता नहीं था, ये पिछले 20 -25 वर्षों से हमारे देश में आया है | कुछ विदेशी कंपनियों और भारतीय कंपनियाँ इस धंधे में लगी हुई हैं | इन्होने चक्कर चलाया और टेलीविजन के माध्यम से जम कर प्रचार किया लेकिन लोगों ने माना नहीं इनकी बात को, तब इन्होने डोक्टरों के माध्यम से कहलवाना शुरू किया | डोक्टरों ने अपने प्रेस्क्रिप्सन में रिफाइन तेल लिखना शुरू किया कि तेल खाना तो सफोला का खाना या सनफ्लावर का खाना, ये नहीं कहते कि तेल, सरसों का खाओ या मूंगफली का खाओ !

अब क्यों, आप सब समझदार हैं, समझ सकते हैं |

ये रिफाइन तेल बनता कैसे हैं ? मैंने देखा है और आप भी कभी देख लें तो बात समझ जायेंगे | किसी भी तेल को रिफाइन करने में 6 से 7 केमिकल का प्रयोग किया जाता है और डबल रिफाइन करने में ये संख्या 12 -13 हो जाती है | ये सब केमिकल मनुष्य के द्वारा बनाये हुए हैं प्रयोगशाला में, भगवान का बनाया हुआ एक भी केमिकल इस्तेमाल नहीं होता, भगवान का बनाया मतलब प्रकृति का दिया हुआ जिसे हम ओरगेनिक कहते हैं | तेल को साफ़ करने के लिए जितने केमिकल इस्तेमाल किये जाते हैं सब Inorganic हैं और Inorganic केमिकल ही दुनिया में जहर बनाते हैं और उनका combination जहर के तरफ ही ले जाता है | इसलिए रिफाइन तेल, डबल रिफाइन तेल गलती से भी न खाएं | फिर आप कहेंगे कि, क्या खाएं ?

तो आप शुद्ध तेल खाइए, सरसों का, मूंगफली का, तीसी का, या नारियल का | अब आप कहेंगे कि शुद्ध तेल में बास बहुत आती है और दूसरा कि शुद्ध तेल बहुत चिपचिपा होता है |
हम लोगों ने जब शुद्ध तेल पर काम किया या एक तरह से कहे कि रिसर्च किया तो हमें पता चला कि तेल का चिपचिपापन उसका सबसे महत्वपूर्ण घटक है | तेल में से जैसे ही चिपचिपापन निकाला जाता है तो पता चला कि ये तो तेल ही नहीं रहा, फिर हमने देखा कि तेल में जो बास आ रही है, वो उसका प्रोटीन कंटेंट है, शुद्ध तेल में प्रोटीन बहुत है, दालों में ईश्वर का दिया हुआ प्रोटीन सबसे ज्यादा है, दालों के बाद जो सबसे ज्यादा प्रोटीन है वो तेलों में ही है, तो तेलों में जो बास आप पाते हैं वो उसका Organic content है प्रोटीन के लिए | 4 -5 तरह के प्रोटीन हैं सभी तेलों में, आप जैसे ही तेल की बास निकालेंगे, उसका प्रोटीन वाला घटक गायब हो जाता है और चिपचिपापन निकाल दिया तो उसका Fatty Acid गायब | अब ये दोनों ही चीजें निकल गयी तो वो तेल नहीं पानी है, जहर मिला हुआ पानी |

ऐसे रिफाइन तेल के खाने से कई प्रकार की बीमारियाँ होती हैं, घुटने दुखना, कमर दुखना, हड्डियों में दर्द, ये तो छोटी बीमारियाँ हैं, सबसे खतरनाक बीमारी है, हृदयघात (Heart Attack), पैरालिसिस, ब्रेन का डैमेज हो जाना, आदि, आदि | जिन-जिन घरों में पुरे मनोयोग से रिफाइन तेल खाया जाता है उन्ही घरों में ये समस्या आप पाएंगे, अभी तो मैंने देखा है कि जिनके यहाँ रिफाइन तेल इस्तेमाल हो रहा है उन्ही के यहाँ Heart Blockage और Heart Attack की समस्याएं हो रही है | जब सफोला का तेल लेबोरेटरी में टेस्ट किया, सूरजमुखी का तेल, अलग-अलग ब्रांड का टेस्ट किया तो AIIMS के भी कई डोक्टरों की रूचि इसमें पैदा हुई तो उन्होंने भी इस पर काम किया और कहा “तेल में से जैसे ही आप चिपचिपापन निकालेंगे, बास को निकालेंगे तो वो तेल ही नहीं रहता, तेल के सारे महत्वपूर्ण घटक निकल जाते हैं और डबल रिफाइन में कुछ भी नहीं रहता, वो छूँछ बच जाता है, और उसी को हम खा रहे हैं तो तेल से जो कुछ पौष्टिकता हमें मिलनी चाहिए वो मिल नहीं रहा है |”

आप बोलेंगे कि तेल के माध्यम से हमें क्या मिल रहा ? मैं बता दूँ कि हमको शुद्ध तेल से मिलता है HDL (High Density Lipoprotin), ये तेलों से ही आता है हमारे शरीर में, वैसे तो ये लीवर में बनता है लेकिन शुद्ध तेल खाएं तब | तो आप शुद्ध तेल खाएं तो आपका HDL अच्छा रहेगा और जीवन भर ह्रदय रोगों की सम्भावना से आप दूर रहेंगे |

अभी भारत के बाजार में सबसे ज्यादा विदेशी तेल बिक रहा है | मलेशिया नामक एक छोटा सा देश है हमारे पड़ोस में | वहां का एक तेल है जिसे पामोलिन तेल कहा जाता है, हम उसे पाम तेल के नाम से जानते हैं, वो अभी भारत के बाजार में सबसे ज्यादा बिक रहा है, एक-दो टन नहीं, लाखो-करोड़ों टन भारत आ रहा है और अन्य तेलों में मिलावट कर के भारत के बाजार में बेचा जा रहा है | 7 -8 वर्ष पहले भारत में ऐसा कानून था कि पाम तेल किसी दुसरे तेल में मिला के नहीं बेचा जा सकता था लेकिन GATT समझौता और WTO के दबाव में अब कानून ऐसा है कि पाम तेल किसी भी तेल में मिला के बेचा जा सकता है | भारत के बाजार से आप किसी भी नाम का डब्बा बंद तेल ले आइये, रिफाइन तेल और डबल रिफाइन तेल के नाम से जो भी तेल बाजार में मिल रहा है वो पामोलिन तेल है | और जो पाम तेल खायेगा, मैं स्टाम्प पेपर पर लिख कर देने को तैयार हूँ कि वो ह्रदय सम्बन्धी बिमारियों से मरेगा | क्योंकि पाम तेल के बारे में सारी दुनिया के रिसर्च बताते हैं कि पाम तेल में सबसे ज्यादा ट्रांस-फैट है और ट्रांस-फैट वो फैट हैं जो शरीर में कभी dissolve नहीं होते हैं, किसी भी तापमान पर dissolve नहीं होते और ट्रांस फैट जब शरीर में dissolve नहीं होता है तो वो बढ़ता जाता है और तभी हृदयघात होता है, ब्रेन हैमरेज होता है और आदमी पैरालिसिस का शिकार होता है, डाईबिटिज होता है, ब्लड प्रेशर की शिकायत होती है | रिफ़ाइण्ड तेल की जगह कच्ची घानी तेल या मूंगफ़ली, सरसों, तिल, olive का तेल ही खाएँ !

🙏 त्रिभुवन गुप्ता, पटियाला 🙏


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